श्री रामदेव कपूर जी का जन्म हिमाचल प्रदेश के जनजातीय ज़िला लाहौल स्पीति के ठोलंग नामक गांव में हुआ । घर में थोड़ा-बहुत संगीत का वातावरण था, इसलिए आपकी
इसके प्रति रूचि बनी ।
आपके पिता जी लोक गीत अच्छा गा लेते थे । इसी के चलते आपको भी गाने का शौक़ हुआ । आपकी स्कूली शिक्षा मालंग गांव में आठवीं कक्षा तक हुई और तत्पश्चात हायर सेकेंडरी की शिक्षा केलंग से पूरी की ।
आपकी अधिक रूचि बांसुरी वादन में थी, इसलिए चोरी-छिपे किसी ब्याह शादी में बैंड पार्टी का वादन सुनने जाया करते थे । सुन सुन कर बांसुरी सीखी । जब आपने कॉलेज में दाखिला लिया तब आपने संगीत विषय लिया। तभी से आपका सीखने का सिलसिला जारी हुआ ।
आपने गायन सक्षम गुरु आदरणीय श्याम ठाकुर जी से सीखा । उस समय आप फिल्मी गाने अच्छे गा लेते थे । हालांकि आप रफी साहब, मुकेश साहिब, मन्ना डे साहब तथा किशोर दा के गाने गा लेते थे, फिर भी कुछ लोग बोला करते थे कि आपकी आवाज़ तलत महमूद साहिब की तरह है और आप उनके गाए गीत गाया करो ।
आपने कोशिश की और सुनने वालों को आपका प्रयास अच्छा लगा ।
सन् 2014 में आपने “वेणु समागम” नामक एक आयोजन में अपनी अहम भूमिका निभाई जिसमें अनेक लोकवादकों ने वेणुवादन किया अर्थात् सामूहिक रूप से बाँसुरी बजाई और जनजातीय क्षेत्र की एक लाजवाब प्रस्तुति दी और लोकसंगीत का सिंचन और संवर्धन किया । आप अनवरत हिमाचली लोकसंगीत की सेवा में जुटे हैं । समृद्ध लोकसंगीत के साथ छेड़छाड़ के आप कट्टर विरोधी हैं ।
सन् 1985 में आप सरकारी नौकरी सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग में करने लगे, जहाँ आपने बतौर नाट्य निरीक्षक सरकारी सेवा शुरू की । तत्पश्चात् आपने सहायक ज़िला लोक सम्पर्क अधिकारी, ज़िला लोक सम्पर्क अधिकारी, उपनिदेशक सूचना एवं जनसम्पर्क के पदों पर कार्य किया । आपको लोक गीत गाने में बेहद रूचि है । आप आकाशवाणी शिमला से मान्यता प्राप्त गायक कलाकार भी हैं ।आजकल आप सेवा निवृत्त हो चुके हैं, मगर संगीत का सफ़र बदस्तूर जारी है ।
