हिमाचल प्रदेश के पंच शक्तिपीठ

1)  ज्वाला जी मंदिर (कांगड़ा)

देवी: माता ज्वाला (अनन्त ज्योति) विशेषता: यहाँ प्राकृतिक अग्नि (ज्योति) बिना किसी ईंधन के निरंतर जलती रहती है। महत्व: 51 शक्तिपीठों में से एक, जहाँ माता सती की जिह्वा (जीभ) गिरी थी। मुख्य आकर्षण: यहाँ किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि ज्योति को ही देवी माना जाता है।

2)  नैना देवी मंदिर (बिलासपुर)

देवी: माता नैना देवी विशेषता: ऊँची पहाड़ी पर स्थित, गोविंद सागर झील का सुंदर दृश्य दिखता है। महत्व: मान्यता है कि माता सती  की आँखें (नयन) यहाँ गिरी थीं। मुख्य आकर्षण: सावन अष्टमी मेला यहाँ बहुत प्रसिद्ध है।

3) चिंतपूर्णी मंदिर (ऊना)

देवी: माता चिंतपूर्णी (छिन्नमस्तिका देवी) विशेषता: श्रद्धालुओं की सभी चिंताएँ दूर करने वाली माता। महत्व: माना जाता है कि माता सती के पग (पाँव) यहाँ गिरे थे। मुख्य आकर्षण: नवरात्रि में यहाँ विशेष मेले और आयोजन होते हैं।

4) बज्रेश्वरी देवी मंदिर (कांगड़ा)

देवी: माता बज्रेश्वरी (माँ दुर्गा का स्वरूप) विशेषता: ऐतिहासिक महत्व और तांत्रिक साधना का प्रमुख स्थान। महत्व: कहा जाता है कि इसे महाभारत काल में पांडवों ने बनाया था। मुख्य आकर्षण: मकर संक्रांति पर मंदिर की दीवारों को मक्खन से सजाया जाता है।

5) चामुंडा देवी मंदिर (कांगड़ा)

देवी: माता चामुंडा (दुर्गा का उग्र रूप) विशेषता: बाणगंगा नदी के किनारे, धौलाधार पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित। महत्व: यहीं पर माता ने चंड और मुण्ड राक्षसों का वध किया था। मुख्य आकर्षण: शांत वातावरण, पास ही एक श्मशान घाट है जहाँ साधु ध्यान करते हैं।

और वेबस्टोरीज़ के लिए फॉलो करें 

हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें